13 February 2017 ko Lucknow me Ittehad e Islami Conference me jama hue Iran aur Hindustan ke Shia w Sunni Ulama..

इस्लामी एकता सम्मेलन में ईरानी और भारतीय शिया व सुन्नी कुछ ओलमा ने एकता के महत्व पर खिताब किया
दुश्मन हमारी कमजोरियों की ताक में रहता है : मौलाना डा0 सईर्दु रहमान नदवी
सही इस्लाम के नाम पर अमरीकी इस्लाम को फेलाया जा रहा है : आयातूउल्लाह मौहसि अराकी
साराजी ताकतें मुसलमानों की एकता से डरती है : मौलाना कलबे जवाद नकवी
कुरान के पास हर मसअले का हल है :डा0 केलब सादिक
दोनों समुदायों के ओलमा एक हो जाएं जनता ख्ुाद एकता का प्रदर्शन करेंगी : मौलाना जहाॅन गीर आलम कासमी
दुश्मन एकता को खत्म करने के लिए उपकरणों की खोज मंे रहता है: मुफ्ती अली अहमद इस्लामी
पषचमी देष इस्लाम की छवी बिगाडने की साजिष कर रहे है। पूर्व इरानी विदेश मंत्री श्री मनोचेहर मुत्तकी
लखनऊ 15 फरवरी : ईरानी शिया व सून्नी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के लखनऊ आगमन पर मजलिसे ओलमाये हिन्द के बेनर तले सलेबरेशन पैलेस में इस्लामी एकता के विषय पर सम्मेलन का आयोजन हुआ।इस सम्मेलन का उद्देश्य इस्लामी एकता के संदेश को सार्वजनिक करना और शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच साम्राज्यवादी शक्तियों द्वारा पैदा की जा रही दूरीयों को खत्म करना था। पहली बार लखनऊ में इस्लामी एकता के विषय पर बहुत महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें नदवा कालेज का प्रतिनिधित्व भी रहा।नदवा के मुहतिम्म मौलाना सईर्दु रहमान नदवी ने सम्मेलन की अध्यक्षता की और इस्लामी एकता के संदेश को सार्वजनिक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सम्मेलन की शुरुआत ईरान से प्रतिनिधिमंडल के साथ आए आकाई हमीदी ने तिलावते कुरान से की।उसके के बाद मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी ने पहली तकरीर करते हुए कहा कि जहालत और नादानी ही हर बुराई की जड़ है। अगरजहातल का अंत हो जाए तो शिया व सुन्नी के बीच मौजूद दूरियाॅ भी खत्म हो जायंे गी ।मौलाना ने इस्लामी एकता के महत्व पर बोलते हुए कहा कि मुझसे एक बार किसी अखबार के पत्रकार ने पूछा था कि मुसलमानों में इतने फिरके हैं इस लिये एकता कैसे संभव है? मैंने उससे सवाल किया कि यह बताओ देशवासियों के बीच कितने खुदाओं की इबादत होती है।मौलाना ने कहा कि देषवासी ना जाने कतने देवताओं को पूजते हैं उसके बावजूद एकजुट हैं। अगर इतने देवताओं के पूजने वाले एकजुट हो सकते हैं तो एक भगवान, एक कुरान और एक नबी स0अ0 के मानने वाले क्यों एकजुट कियों नहीं हो सकते।
नदवा के मुहतिम्म मौलाना सईर्दु रहमान अजमी नदवी ने अपनी अध्यक्ष तकरीर मंे कहा कि मेरी खुशनसीबी है कि हमंे इस महान सभा में शामिल होने का मौका मिला है। इसलामी एकता के लिए यह सभा बहुत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक हैसियत रखती है। मौलाना ने कहा कि अल्लाह ने कौम व जनजाति परिचय के लिए पैदा किए हैं,चिंतन का मतभेद विचारधारा को एकजुट करने का जरिया है,मौलाना ने कह कि हमें ऐसी ताकतों से सावधान रहना होगा जो हमें टकराने का काम करती हैं। ऐसी शक्तियाॅं जो हमेशा कहती आई हैं कि लड़ाई और राज करो। पश्चिमी देषों ने जो सामराजी निजाम हमारे सिरों पर थोपा है उसका उद्देश्य मुसलमानों में अराजकता फैलाकर उन्हें टकराना है। पैगम्बरए इसलाम ने कहा है कि मुसलमान की मिसाल उस शरीर की है जिसके एक हिस्से में दर्द होता है तो पूरा शरीर दर्द से बिलबिला उठता है।मुसलमान एक शरीर की तरह हैं इसलिए हमें एक उम्मत कहा गया है। इस लिए जरूरी है कि हम एकजुट हों और एक दूसरे का खयाल रखें । मौलाना ने अधिक अपने संबोधन में कहा कि हमें लड़ाने के लिए जिन कारणों का इस्तेमाल किया जा रहा है उन्हें विफल करना बहुत जरूरी है क्योंकि दुश्मन हमारी कमजोरियों की ताक में रहता है। मौलाना ने कहा के ये ऐतिहासिक सम्मेलन है। इस सम्मेलन के प्रभाव इस्लामी समाज और भारतीय मुसलमानों मंे जरूर देखे जाएंगे।
ईरान से आये अयातुल्ला मौहसिन अराकी ने कहा कि कुरान ने दो इस्लाम बताए हैं एक अराबी इस्लाम है और दूसरा इब्राहीमी इस्लाम है। दोनों की अलग अलग गुणों व लक्षण कुरान में वर्णित हैं जिनका अध्ययन किया जा सकता है । अराबी इस्लाम जाहेरी व दिखवटी इस्लाम है मगर इब्राहीमी इस्लाम सच्चा इस्लाम है जिसे दीनए हनीफ भी कहा गया है। कुरान की इन्हीं अयतों से इज्तेहाद करते हुए इमाम खुमैनी ने कहा था कि आज भी दो इस्लाम मौजुद हैं, एक अमेरिकी इस्लाम है और दूसरा वास्तविक इस्लाम इस्लाम ए मोहम्मदी है।आयातु अल्लाह मोहसिन इराकी ने आगे अपने बयान में कहा कि जिस तरह पिछले बीस वर्षों में साम्राज्यवादी ताकतों ने इस्लाम को बदनाम और कमजोर करने के लिए अमेरिकी इस्लाम के प्रचार किया उसी तरह पिछले कुछ वर्षों में शियो के असली व सच्ची षियत के मुकाबले मंे लंदनी षियत कों फेलाया गया। ।एक शिया वास्तविक जो कुरान सुन्नते पैगम्बर और अहले बैत की शिक्षाओं से जुड़े है और दूसरे शिया लंदनी है जिसका प्रचार इस्तेमारी शक्तियां और पश्चिमी देश कर रहे हैं इसलिए हर कदम पर सावधानी की जरूरत है। यही लोग विभिन्न हीलों और रणनीति द्वारा मुसलमानों और शियों में मतभेद पेदा करते हैं।
ईरान से आए सुन्नी मेहमान श्री मुफ्ती अली अहमद सलामी (सदस्य मजलिसए खबरगानए रहबरी ईरान) ने अपने भाषण में कहा कि हमें साम्राज्यवादी रणनीति से होशियार रहना होगा। उनहों ने कहा कि मुसलमानों के पास वह सब कुछ हैं जो विकास की गारंटी माना जाता है। मुसलमानों के पास कुरान के रूप में अच्छी प्रणाली जीवन मौजूद है ,दुनियवी लिहाज से भी मुसलमान समृद्ध हैं ,सभी प्राकृतिक भंडार एन्थ्रेसाइट नियात व कानें मुसलमानों के पास मौजूद हैं,जुगराफियाई लिहाज से भी इस्लामी देषों को एक अलग पहचान है। यही चीजें हैं जो विकास का माध्यम बनती हैं। फिर भी आखिर क्या वजह है कि इन सभी संसाधनों के होते हुए पिछड़ेपन का शिकार है।उसकी बड़ी वजह एकता का न होना है। अगर इस्लामी देष एकजुट हो जाए तो वह दुनिया में अलग और बडा स्थान प्राप्त कर सकता है।
डा0 सैयद कल्बे सादिक नकवी ने अपने भाषण में कहा कि हर समस्या का समाधान कुरान के पास मौजूद है। अगर तुम्हारे बीच मतभेद हो जाए तो कुरान के पास जाओ ताकि समस्या का समाधान मिल सके ।मेरा सवाल ये है कि क्या कुरान ने कहा है कि मुसलमान आपस में लड़ें। किया नबी की सुनन्त मंे ऐसा आदेश आया है। अगर कुरान और सुन्नते नबी स0अ0 मंे कहीं लड़ने का आदेश नहीं है तो फिर मुसलमान आपस में क्यों लड़ रहे हैं? आइए कुरान मै इस मसअले का हल खोजते हैं। कुरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह शैतान है जो मुसलमानों को आपस में लड़ाता है और लड़ाता रहेगा ।इसका मतलब यह है कि एक शैतान कयामत तक के लिए मुसलमानों को लड़ाने के लिए साथ रहेगा और वह शैतान अमेरिका है । मौलाना ने कहा कि कुरान ने कहीं यह नहीं कहा कि तुम घातक से घातक हथियार बना लोगे तो सफल हो जाओगे , कुरान ने कहा है कि तुम मोमिन बनो और डरो नहीं उसके बाद तुम्हें कभी कोई हरा नहीं पाएगा। मौलाना ने दारुल उलूम देवबंद से निकलने वाले रिसाले को दिखाते हुए कहा कि इस पुस्तिका में केवल इस विषय पर लेख लिखे गए हैं कि कैसे शिया व सुन्नी एकता स्थापित हो सकता है। वे सभी सूत्र वर्णित हैं जिन पर अमल करते हुए एकता की कोशिश सफल हो सकती है। अगर देवबंद जैसी संस्था एकता के लिए हाथ आगे बढ़ा रही हे तो आगे क्या रह जाता है। मौलाना ने पैगंबर मोहम्मद स0अ0 का कौल बयान करते हुए कहा कि हर बुराई की जड़ अज्ञानता है। अगर अज्ञान समाप्त हो जाये तो सब फसाद खतम हो जाईनगे । मौलाना ने आगे कहा कि कुरान में कहां यह लिखा है कि कुरान न पढ़े उसे गोली मार दो। यह जिहादी जो आज इस्लाम के नाम पर आतंक फैला रहे हैं दरअसल उन्हें कुरान पढ़ना भी नहीं आता है और ये तथ्य गैर मुस्लिम ता जानते है।
मौलाना जहाॅगीर आलम कासमी ने इस्लामी एकता के लिए हो रही कोशिशों की सराहना करते हुए कहा कि जब पैगंबर मदीना आए तब दो कबीले ओस व खजर्ज आपस मंे लड कर तबाह हो रहे थे और लडाई के लिए अरब में वह प्रसिद्ध थे। वह लोग जो सालों से लड रहे थे उन्हें मौहम्मद स0अव ने एक कलमे द्वारा एकजुट कर दिया। मौलाना ने कहा कि शिया व सुन्नी इस्लाम की दो शाखाएं हैं। दोनों का विश्वास अल्लाह कुरान और नबी पर है फिर आखिर क्या वजह है कि शिया व सुन्नी फसाद की खबरें आती रहता है। क्या कुरान का संदेश वहाॅ आम नहीं है? इन दंगों का नुकसान यह हुआ कि हमारी सोच बंट गई, दिल बट गए, मोहल्ले बट गए, परिवार विभाजित हो गए। क्या वह रसूले इस्लाम के इस कौल से परिचित नहीं हैं कि अल्लाह के लिये सारी दुनिया को नष्ट कर देना आसान है लेकिन एक इंसान की हत्या कर देना उसे पसंद नहीं है। मौलाना ने आगे अपने बयान मै कहा कि अगर हम एकजुट होते और एकता के लिए हर संभव प्रयास करते तो आज ईरान से हमारे मेहमानों को एकता का संदेश लेकर भारत नहीं आना पड़ता।
पूर्व विदेश मंत्री श्री मनोचेहर मुत्तकी ने अपने बयान में कहा कि इस्लामी एकता की मूल आवश्यकता है। जहां कहीं भी अराजकता है उसके पीछे दोसरे लौग रहे हैं चाहे वह इस्लाम के षुरू मै हो या आज का दौर हो। उन्होंने कहा कि इस्लाम की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता से घबराये पश्चिम ने पूरी योजना के साथ यह तय किया कि इस्लाम के चेहरे को विकृत कर दिया जाये और इस्लाम का खूंखार चेहरा दुनिया के सामने पेश किया जाए ताकि दुनिया इस्लाम की ओर आकर्षित न हो,इस लिये उसने आई0एस0 जैसे संगठन को खड़ा किया और इस्लाम की ऐसी तस्वीर दुनिया के सामने रखी जो बहुत भयभीत करने वाली है।करोड़ों डॉलर खर्च करके भी वह नहीं कर सकते थे इसलिए उन्होंने यह काम मुसलमानों द्वारा ही अंजाम दिया और मुसलमानों को ही मुसलमानों के मुकाबले में लाकर खड़ा कर दिया ताकि मतभेद डाल कर वह अपने लक्ष्य में सफल हो सकें।
सम्मेलन का संचालन मौलाना मंजर सदिक ने किया। सम्मेलन मै ईरान व भारत के सुन्नी व षिया ओलमा ने भाग लिया। सम्मेलन मजलिसए ओलमाए हिंद द्वारा आयोजित किया गया।
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’’اتحاد اسلامی کانفرنس‘‘ میں ایرانی و ہندوستانی شیعہ وسنی علماء نے وحدت المسلمین کی اہمیت پر زور دیا
دشمن ہماری کمزوریوں کی تاک میں رہتاہے :مولانا ڈاکٹر سعیدالرحمٰن ندوی
حقیقی اسلام و اصل تشیع کے نام پر لندنی تشیع کو فروغ دیا جارہاہے :آیت اللہ محسن اراکی
سامراجی طاقتیں مسلمانوں کے اتحاد سے ڈرتی ہیں :مولانا سید کلب جواد نقوی
قرآن کے پاس ہر مسئلہ کا حل موجود ہے :ڈاکٹر کلب صادق
دونوں فرقوں کے علماء متحد ہوجائیں عوام خود بخود اتحاد کا مظاہرہ کریں گے :مولانا جہان گیر عالم قاسمی
عالم اسلام کا اتحاد ہی انکی ترقی کی ضمانت بن سکتاہے :مفتی علی احمد اسلامی
مغربی طاقتیں اسلام کے چہرہ کو مسخ کرنے کے لئے کوشاں ہیں :سابق ایرانی وزیر خارجہ منوچہر متکی
لکھنؤ ۱۵ فروری : ایران سے شیعہ وسنی اعلیٰ سطحی وفدکی لکھنؤ آمد پر مجلس علماء ہند کے زیر اہتما م سلیبریشن ہال میں ’’اتحاد اسلامی کانفرنس‘‘ کا انعقاد عمل میں آیا ۔کانفرنس کا مقصد وحدت اسلامی کے پیغام کو عام کرنا اور شیعہ و سنی مسلمانوں کے درمیان سامراجی طاقتوں کے ذریعہ پیدا کی جارہی دوریو ں کو ختم کرنا تھا ۔پہلی بار لکھنؤ میں ’’اتحاد اسلامی ‘‘ کے موضوع پر اتنی اہم کانفرنس منعقد ہوئی تھی جس میں ندوۃ العلماء کی بھرپوری نمائندگی رہی ۔ندوۃ العلما ء کے مہتمم مولانا سعیدالرحمٰن ندوی نے کانفرنس کی صدارت کی اور اتحاد اسلامی کے پیغام کو عام کرنے میں اہم کردار اداکیا ۔
ایرانی وفد کے ساتھ تشریف لائے آقائی حمیدی نے تلاوت قرآن کریم سے کانفرنس کا آغاز کیا۔تلاوت کے بعد قائد ملت مولانا سید کلب جواد نقوی نے افتتاحی تقریر کرتے ہوئے کہاکہ جہالت و نادانی ہی ہر برائی کی جڑہے ۔اگر جہالت کا خاتمہ ہوجائے تو شیعہ و سنی کے درمیان موجود دوریا ں بھی ختم ہوجائینگی ۔مولانانے اتحاد اسلامی کی اہمیت پر خطاب کرتے ہوئے کہاکہ مجھ سے ایک بار کسی اخبار کے متعصب صحافی نے پوچھا تھاکہ آخر مسلمانوں میں اتنے فرقہ ہیں تو اتحاد کیسے ممکن ہے ؟ میں نے اس سے سوال کیاکہ یہ بتائو برادران وطن کے درمیان کتنے خدائو ں کی پرستش ہوتی ہے ؟مولانانے کہاکہ برداران وطن لاتعداد خدائوں کو پوجتے ہیں اسکے باوجود متحد ہیں ۔اگر لا تعداد خدائوں کے پوجنے والے متحد ہوسکتے ہیں تو پھر ایک خدا ،ایک قرآن اور ایک رسولؐ کے ماننے والے کیوں متحد نہیں ہوسکتے ۔مولانانے کہ ’’اتحاد اسلامی کانفرنس‘‘ایک تاریخی کانفرنس ہے اور اس کانفرنس کا پیغام ان شاء اللہ بہت دور تک جائے گا اور اسکے مثبت اثرات مرتب ہونگے ۔
اپنی صدارتی تقریر میں ندوۃ العلماء کے مہتمم ڈاکٹر مولانا سعیدالرحمٰن ندوی نے کہاکہ میری خوش نصیبی ہے کہ مجھے اس عظیم اجتماع میں شریک ہونے کا موقع ملاہے ۔امت واحدہ کی تشکیل و وحدت کے لئے یہ اجتماع بہت اہم اور تاریخی حیثیت رکھتاہے ۔مولانا نے کہاکہ اللہ نے قوم و قبیلے کو تعارف کے لئے پیداکیاہے ،نظریاتی اختلاف افکار کو متحد کرنے کا ذریعہ ہے ۔مولانانے کہاکہ ہمیں ایسی طاقتوں سے ہوشیار رہنا ہوگا جو ہمیں ٹکرانے کا کام کرتی ہیں۔ایسی طاقتیں جو ہمیشہ کہتی آئی ہیں کہ لڑائو اور حکومت کرو ۔بلاد مغرب سے جو استعمار ہمارے سروں پر مسلط ہوا اسکا مقصد مسلمانوں میں انتشار پھیلاکر انہیں ٹکرانا تھا ۔مولانانے کہاکہ پیغمبر اسلام ؐ نے فرمایا ہے کہ مومنین کی مثال اس جسم کی سی ہے جسکے ایک حصہ میں درد ہوتا ہے تو پورا جسم درد سے بلبلا ا ٹھتاہے ۔مسلمان ایک جسم کی طرح ہیں اسی لئے ہمیں امت واحدہ کہاگیاہے ۔اس لئے ضروری ہے کہ ہم متحد ہوں اور ایک دوسرے کا خیا ل رکھیں ۔مولانانے مزید اپنے خطاب میں کہاکہ ہمیں لڑانے کے لئے جن اسباب کا استعمال کیا جارہاہے انہیں ناکام کرنا بہت ضروری ہے کیونکہ دشمن ہماری کمزوریوں کی تاک میں رہتاہے ۔وحدت اسلامی کا پرچم لہراکر ہی دشمن کو ناکام بنایا جاسکتاہے ۔اسی مقصد کے تحت یہ کانفرنس منعقد ہورہی ہے ۔مولانا نے آخرکلام میں کہاکہ ’’اتحاد اسلامی کانفرنس‘‘ ایک تاریخی کانفرنس ہے ۔اس کانفرنس کے اثرات عالم اسلام اور ہندوستانی مسلمانوں پر ضرور مرتب ہونگے ۔
مجمع تقریب بین المذاھب کے جنرل سکریٹری آیت اللہ محسن اراکی نے کہاکہ قرآ ن نے دو اسلام بتائے ہیں ایک اعرابی اسلام ہے اور دوسرا ابراہیمی سلا م ہے ۔دونوں کی الگ الگ خصوصیات و علامتیں قرآن میں ذکرہوئی ہیں جنکا مطالعہ کیا جاسکتاہے ۔اعرابی اسلام ظاہری اسلام ہے مگر ابراہیمی اسلام حقیقی اسلام ہے جسے دین حنیف بھی کہا گیاہے ۔قرآن کی انہی آیات سے اجتہاد کرتے ہوئے امام خمینی نے فرمایا تھاکہ آج بھی دو اسلام موجود ہیں ایک امریکی اسلام ہے اور دوسرا حقیقی اسلام ناب محمدی ہے ۔آیت اللہ محسن اراکی نے مزید اپنے بیان میں کہاکہ جس طرح گزشتہ بیس برسوں میں سامراجی طاقتوں نے اسلام کو بدنام اور کمزور کرنے کے لئے امریکی اسلام کی ترویج کی اسی طرح حالیہ چند برسوں میں تشیع کے اندر بھی حقیقی و اصل تشیع کے مقابلے لندنی تشیع کو فروغ دیا جارہاہے ۔ایک تشیع حقیقی ہے جو قرآن ،سنت پیغمبرؐ اور اھل بیتؑ کی تعلیمات سے وابستہ ہے اور دوسرا تشیع لندنی ہے جسکی تبلیغ استعماری طاقتیںا ور مغربی ممالک کررہے ہیں اس لئے ہر قدم پر ہوشیاری کی ضرورت ہے ۔یہی لوگ مختلف حیلوں و حربوں کے ذریعہ مسلمانوں اور شیعوں میں اختلافات ایجاد کرتے ہیں ۔
ایران سے تشریف لائے مہمان جناب مفتی علی احمد سلامی( رکن مجلس خبرگان رہبری ایران) نے اپنی تقریر میں کہاکہ اللہ نے امت مسلمہ کو وہ تمام چیزیں عطا کی ہیں جو ترقی کی ضمانت سمجھی جاتی ہیں ۔مسلمانوں کے پاس قرآن کی شکل میں بہترین نظام حیات موجودہے ۔مادی لحاظ سے بھی مسلمان مالا مال ہیں ۔تمام معدنیات و ذخائر مسلمانوں کے پاس موجود ہیں ۔جغرافیائی لحاظ سے بھی عالم اسلام کو ایک امتیاز حاصل ہے ۔یہی وہ چیزیں ہیں جو ترقی کا ذریعہ بنتی ہیں ۔ پھر بھی آخر کیا وجہ ہے کہ امت مسلمہ ان تمام وسائل کے ہوتے ہوئے پسماندگی کا شکار ہیں ۔اسکی بڑی وجہ اتحاد کا نہ ہونا ہے ۔اگر عالم اسلام متحد ہوجائے تو وہ دنیا میں امتیازی مقام حاصل کرسکتاہے ۔
مولانا جہان گیر عالم قاسمی نے اتحاد اسلامی کے لئے ہورہی کوششوں کو سراہتے ہوئے کہاکہ جس وقت پیغمبر اسلام مدینہ تشریف لائے اس وقت دو قببیلے اوس و خزرج کشت و خون کے لئے عرب میں مشہور تھے ۔وہ قبیلے جو مدتوں سے کشت و خون کا شکارتھے انہیں رسول خداؐ نے ایک کلمہ کے ذریعہ متحد کردیا ۔مولانا نے کہاکہ شیعہ و سنی اسلام کی دو شاخیں ہیں ۔دونوں کا ایمان اللہ،قرآن اور نبیؐ پر ہے پھر بھی آخر کیا وجہ ہے کہ آپسی جھگڑوں کی خبریں آتی رہتی ہیں؟کیا قرآن کا پیغام مسلمانوں کے درمیان عام نہیں ہے ؟ان فسادات کا نقصان یہ ہواکہ ہماری سوچ بٹ گئی ،دل بٹ گئے ،محلے بٹ گئے ،خاندان تقسیم ہوگئے ۔کیا وہ رسول اسلامؐ کے اس قول سے واقف نہیں ہیں کہ اللہ کے نزدیک ساری دنیا کا تباہ کردینا آسان ہے مگر ایک انسان کا قتل کردینا اسے پسند نہیں ۔اگر آج مسلمان متحد ہوتے تو عالمی سطح پر ایسے حالات پیدا نہ ہوتے ۔اگر ہم متحد ہوتے تو آج ہماری تباہی کا مرثیہ نہ پڑھاجارہاہوتا ۔مولانا نے مزیدکہاکہ اگر ہم متحد ہوتے اور اتحاد کے لئے ہر ممکن کوشش کرتے تو آج ایران سے ہمارے مہمانوں کو اتحاد اسلامی کا پیغام لیکر ہندوستان نہ آنا پڑتا۔
ڈاکٹر سید کلب صادق نقوی نے اپنی تقریر میں کہاکہ ہر مسئلہ کا حل قرآن کے پاس موجود ہے ۔اگر تمہارے درمیان اختلاف ہوجائے تو قرآن کے پاس جائو تاکہ مسئلہ کا حل مل سکے ۔میرا سوال یہ ہیکہ کہ کیا قرآن نے کہاہے کہ مسلمان آپس میں لڑیں ۔یاسنت رسولؐ میں کہیں ایسا حکم موجود ہے ۔اگر قرآن اور سنت رسول ؐ میں کہیں لڑنے کا حکم نہیں ہے تو پھر مسلمان آپس میں کیوں لڑرہے ہیں ؟آئیے قرآن سے دریافت کرتے ہیں ۔قرآن نے واضح الفاظ میں کہاہے کہ وہ شیطان ہے جو مسلمانوں کو آپس میں لڑاتا ہے اور لڑاتا رہیگا ۔اسکا مطلب یہ ہے کہ ایک شیطان قیامت تک کے لئے مسلمانوں کو لڑانے کے لئے ساتھ رہے گا اوروہ امریکہ ہے ۔مولانانے کہاکہ قرآن نے کہیں یہ نہیں کہاکہ تم مہلک سے مہلک ہتھیار بنالو گے تو کامیاب ہوجائوگے ۔بلکہ قرآن نے کہاہے کہ تم مومن رہو اور ڈرو نہیں اسکے بعد تمہیں کبھی کوئی ہرانہیں پائے گا ۔مولانا نے دارالعلوم دیوبند سے نکلنے والے رسالہ ترجمان دارلعلوم کا حوالہ پیش کرتے ہوئے کہاکہ اس رسالہ میں صرف اس موضوع پر مضامین لکھے گئے ہیں کہ کیسے شیعہ و سنی اتحاد قائم ہوسکتاہے ۔وہ تمام فارمولے بیان کئے گئے ہیں جن پر عمل کرتے ہوئے اتحاد کی کوشش کامیاب ہوسکتی ہے ۔اگر دیوبند جیسا ادارہ اتحاد کے لئے ہاتھ آگے بڑھارہاہے تو پھر آگے کیا باقی رہ جاتاہے ۔مولانا نے پیغمبر اسلام ؐ کا قول پیش کرتے ہوئے کہاکہ ہر برائی اور ہر شر کی جڑ جہالت ہے ۔اگر جہالت ختم ہوجائے تو تمام برائیاں خود بخود ختم ہوجائینگی ۔مولانا نے مزیدکہاکہ قرآن میں یہ کہاں لکھا ہوا کہ جو قرآن نہ پڑھے اسے گولی ماردو ۔یہ جہادی جو آج اسلام کے نام پر دہشت پھیلارہے ہیں در اصل ا نہیں قرآن پڑھنا بھی نہیں آتا اور اس حقیقت کو غیر مسلم تک جانتے ہیں۔
سابق وزیر خارجہ جناب منوچہر متکی نے اپنے بیان میں کہاکہ اتحاد اسلامی وقت کی اہم ضرورت ہے ۔جہاں کہیں بھی انتشار و افتراق ہے اسکے پس پردہ اغیار رہے ہیں چاہے وہ صدر اسلام ہو یا آج کا دور ہو ۔انہوں نے کہاکہ اسلام کی تیزی سے بڑھتی ہوئی مقبولیت سے گھبراکر مغرب نے پوری منصوبہ بندی کے ساتھ یہ طے کیاکہ اسلام کے چہرہ کو مسخ کردیا جائے اور اسلام کا خونخوار چہرہ دنیا کے سامنے پیش کیا جائے تاکہ دنیا اسلام کی طرف راغب نہ ہو ۔چنانچہ اس نے داعش جیسی تنظیم کو کھڑا کیا اور اسلام کی ایسی تصویر دنیا کے سامنے رکھی جو بہت خوفزدہ کرنے والی تھی ۔وہ کام جو کروڑوں ڈالر خرچ کرنے کے بعدبھی وہ نہیں کرسکے وہ کام انہوں نے نام نہاد مسلمانوں کے ذریعہ انجام دیا اور مسلمانوں کو ہی مسلمانوں کے مقابلے میں لاکر کھڑا کردیا تاکہ اختلاف و افتراق کے ذریعہ وہ اپنے مقاصد میں کامیاب ہوسکیں ۔
کانفرنس کے اختتام پر مجلس علماء ہند کے جنرل سکریٹری مولانا سید کلب جواد نقوی نے تمام مہمانوں کا شکریہ ادا کرتے ہوئے کہاکہ اس تاریخی کانفرنس میں شیعہ و سنی علماء کا متحد ہونا اتحاد کے پیغام کو عالمی سطح پر عام کرنے میں معاون ثابت ہوگا۔مولانا نے کہاکہ شیعہ و سنی میں کوئی اختلاف نہیں ہے ۔سامراجی طاقتوں کے ایجنٹ ہیں جو اختلافات پیدا کرنے کی کوشش کرتے ہیں ۔مولانانے کہاکہ آئندہ بھی ایسی کوششیں ہوتی رہینگی تاکہ سامرجی منصوبوں کا ناکام بنایا جاسکے کیونکہ سامراج مسلمانوں کے اتحاد سے ہی ڈرتاہے۔
کانفرنس کی نظامت و ترجمہ کی ذمہ داری مولانا منظر صادق زیدی نے انجام دی ۔کانفرنس میں سیکڑوں علماء کرام نے شرکت کی اور علماء کے بیانات سے مستفیض ہوئے ۔

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